UAE Muslim : भारत से सीखे दुनिया जानिए क्या है पूरा सच |

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UAE Muslim
UAE Muslim : islam can learn from india

UAE Muslim : यूएई के मुस्लिम परिषद् ने भारतीय इस्लाम के रूप को लेकर उन्होंने एक किताब निकाली है। और इस किताब में कई मशहूर विशेषज्ञों के इसमें लेख शामिल है। इस किताब में यह लिखा गया है कि भारतीय इस्लाम का मॉडल पुरे दुनिया भर के मुसलमानों के लिए एक अच्छे उदाहरण के रूप में काम कर सकता है।

संयुक्त अरब अमीरात के विश्व मुस्लिम समुदाय के परिषद ने भी भारतीय इस्लाम पर एक किताब जिसका नाम ‘धर्मशास्त्र , न्यायशास्त्र और समकालिक परंपरा : इस्लाम का भारतीयकरण ‘ प्रकाशित भी कि है । इस किताब में इस्लाम के क्षेत्रीय स्वरूपों पर जोर देने और इस्लाम के एक रूप को ना मानने कि बात कही गई है।

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इंडियन एक्सप्रेस कि एक रिपोर्ट के अनुसार , इस किताब में इस्लाम के ‘ सच्चे ‘ प्रतिनिधित्व के रूप में पेश किए जा रहे धर्म के ‘अरबीकरण ‘ पर चर्चा इसमें कि गई है।

यूएई के मुस्लिम परिषद के वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ अब्बास पनक्कल यह कहा है कि , ‘अरब संस्कृति को इस्लाम के रूप में बढ़ावा देने और साथ ही इस्लाम के एक प्रकार को मानने में कई तरह कि दिक्कतें हो रहे है।

किताब में ब्रिटिश कोलंबिया विश्विद्यालय , वैंकूवर के एक डॉ सेबेस्टियन आर प्रांज, और साथ में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के डॉ मोइन अहमद निजामी और नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के डॉ. फैजान मुस्तफा के भी लेख शामिल हैं।

यूएई मुस्लिम (UAE Muslim)भारतीय इस्लाम का मॉडल है बेहतरीन मिसाल

वैंकूवर के डॉ सेबेस्टियइस आर प्रांज ने इस किताब में ‘ मॉनसून इस्लाम ‘ शब्द को इन्होने ही इजाद किया है , और यह शब्द इस्लाम कि विविधता को प्रदर्शित भी करता है। उन्होंने ने यह शब्द अरब व्यापारियों को ध्यान में रखते हुए इसको इजाद किया है , जो यह मॉनसून हवाओं कि दिशा के बाद दक्षिण एशिया कि यात्रा करते थे ।

इस्लाम को बढ़ावा देने वाले वो सामान्य अरब व्यापारी न तो किसी सरकार के प्रतिनिधि थे। और न ही वह मान्यता प्राप्त धार्मिक अधिकारी थे। उन व्यापारियों ने मुस्लिम गढ़ों के बहार इस्लाम को विकसित किया जो संस्कृति को आत्मसात किए हुए था। और तभी इस्लाम में धर्म के मूल को ज्यों का त्यों बनाए रखा गया. प्रांज का तो यह भी कहना है कि मालावार तट के किनारे कि मस्जिद हिन्दू औरन मुस्लिम वास्तुकला के मेल का जीवन का ही एक उदाहरण है।

उन्होंने किताब में दक्षिण भारत के कुछ जगह के मंदिरो और मुसलमानो ने दोनों के द्वारा पूजा किए जाने का भी जिक्र साथ में किया है।

और वही दूसरे ओर, डॉ. मुस्तफा अपने लेख में यह कहते है कि मुस्लिम शासकों ने मंदिरों को अनुदान देकर, ओर साथ ही गोहत्या पर प्रतिबंध लगाकर और हिंदुओं को महत्वपूर्ण पदों पर भी रखकर सांस्कृतिक मेलजोल को और भी बढ़ावा दिया। उन्होंने यह भी कहा है कि ऐतिहासिक किताब जिसका नाम ‘चचनामा ‘ के अनुसार , मुसलमानों ने ईसाइयों और यहूदियों की तरह ही हिंदुओं को भी अपनत्व दिया.

उन्होंने यह भी लिखा है कि कुछ मुस्लिम शासकों ने अपने सिक्कों पर देवी लक्ष्मी और साथ में भगवन शिव के बैल की आकृतियां भी उकेरी हैं।

अबू धाबी में स्थित मुस्लिम परिषद का यह भी मानना है कि भारतीय इस्लाम मॉडल ‘ दुनिया भर में मुस्लिम समुदायों के लिए बहुत ही अच्छे उदाहरण के रूप में काम कर सकते है।